श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.11.7 
विरक्त सन्न्यासी आमार राज - दरशन ।
स्त्री - दरशन - सम विषेर भक्षण ॥7॥
 
 
अनुवाद
"चूँकि मैं संन्यासी हूँ, इसलिए मेरे लिए किसी राजा से मिलना उतना ही ख़तरनाक है जितना किसी स्त्री से मिलना। दोनों में से किसी से भी मिलना ज़हर पीने के समान होगा।"
 
"I am a monk, so meeting a king is as dangerous for me as meeting a woman. Meeting these two is like drinking poison."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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