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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  2.11.68 
नरेन्द्रे आसिया सबे हैल विद्यमान ।
ताँ - सबारे चाहि वासा प्रसाद - समाधान ॥68॥
 
 
अनुवाद
"वे सभी नरेंद्र झील के किनारे पहुँच चुके हैं और वहाँ प्रतीक्षा कर रहे हैं। मैं उनके लिए आवास और प्रसाद की व्यवस्था चाहता हूँ।"
 
"They have all arrived at the banks of Narendra Sarovar and are waiting there. I want to make arrangements for their accommodation and offerings."
तात्पर्य
नरेन्द्र जगन्नाथ पुरी में आज भी मौजूद एक छोटी सी झील है, जहां चंदन-यात्रा उत्सव होता है। आज तक, जो भी बांग्ला भक्त जगन्नाथ मंदिर जाते हैं, वे सबसे पहले इस झील में स्नान करते हैं। वे मंदिर में प्रवेश करने से पहले वहीं अपने हाथ और पैर धोते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)