श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  2.11.65 
सार्वभौम नीलाचले आइला प्रभु लञा ।
प्रभु आइला , - राजा - ठाञि कहिलेन गिया ॥65॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सार्वभौम भट्टाचार्य भगवान चैतन्य को जगन्नाथपुरी वापस ले आए। फिर वे राजा प्रतापरुद्र के पास गए और उन्हें भगवान के आगमन की सूचना दी।
 
Thus, Sarvabhauma Bhattacharya brought Lord Chaitanya back to Jagannatha Puri. He then went to King Prataparudra and informed him of Mahaprabhu's arrival.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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