श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  2.11.59 
शुनि’ गजपतिर मने सुख उपजिल ।
प्रभुरे मिलिते एइ मन्त्रणा दृढ़ कैल ॥59॥
 
 
अनुवाद
महाराज प्रतापरुद्र ने भट्टाचार्य की सलाह मानकर उनके निर्देशों का दृढ़तापूर्वक पालन करने का निश्चय किया। इस प्रकार उन्हें दिव्य सुख की अनुभूति हुई।
 
Maharaja Prataparudra accepted Bhattacharya's advice and determined to follow his orders. Thus, he experienced transcendental bliss.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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