श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  2.11.56 
‘कृष्ण - रास - पञ्चाध्याय’ करिते पठन ।
एकले याइ’ महाप्रभुर धरिबे चरण ॥56॥
 
 
अनुवाद
"जब श्री चैतन्य महाप्रभु गुंडिका उद्यान में प्रवेश करें, तो तुम्हें भी वहाँ जाकर भगवान कृष्ण के गोपियों के साथ नृत्य के बारे में श्रीमद्भागवतम् के पाँच अध्याय पढ़ने चाहिए। इस प्रकार तुम भगवान के चरणकमलों को पकड़ सकोगे।"
 
"When Sri Chaitanya Mahaprabhu enters the Gundicha Garden, you should also go there and read the five chapters of the Srimad Bhagavatam that describe Krishna's Rasa dance with the gopis. This way you can catch hold of Mahaprabhu's lotus feet."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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