सतातं कीर्तयन्तो माम् यतन्तश्च दृढ़-व्रताः
नमस्यन्तश्च माम् भक्त्या नित्य-युक्तोपासते
"हमेशा मेरे महिमा का कीर्तन करते हुए, महान निश्चय से प्रयास करते हुए, मेरे सामने नतमस्तक होकर, ये महान आत्माएँ निरंतर भक्ति से मेरी उपासना करती हैं।"
ये भगवान की सेवा में पूर्ण कृष्ण-चेतना में लगे हुए एक महात्मा के लक्षण हैं। इस प्रकार, महाराजा प्रतापरुद्र का निश्चय बहुत ऊँचा माना जाता है और इसे दृढ़-व्रत कहा जाता है। इस दृढ़ निश्चय के कारण, वह अंततः भगवान चैतन्य की प्रत्यक्ष कृपा प्राप्त करने में सफल हुए।
