श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  2.11.48 
ताँर प्रतिज्ञा - मोरे ना करिबे दरशन ।
मोर प्रतिज्ञा - ताँहा विना छाड़िब जीवन ॥48॥
 
 
अनुवाद
महाराज प्रतापरुद्र ने आगे कहा, "यदि श्री चैतन्य महाप्रभु मुझे न देखने के लिए दृढ़ हैं, तो मैं भी उन्हें न देख पाने पर अपने प्राण त्यागने के लिए दृढ़ हूँ।
 
Maharaja Prataparudra further said, “If Sri Chaitanya Mahaprabhu has resolved not to see me, then I am also determined that if I do not get His darshan, I will give up my life.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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