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अनुवाद
“हाय! क्या श्री चैतन्य महाप्रभु ने महाराज प्रतापरुद्र नामक राजा को छोड़कर सभी प्रकार के पापियों का उद्धार करने के लिए अवतार लिया है?
“Alas, has Sri Chaitanya Mahaprabhu Maharaja incarnated only for the salvation of all sinners except the king named Prataparudra?”
तात्पर्य
श्री चैतन्य महाप्रभु के मिशन का वर्णन नरोत्तम दास ठाकुर इस प्रकार से करते हैं : पतित-पावन-हेतु तव अवतार/ मो-सम पतित प्रभु ना पाइबे आर। अगर श्री चैतन्य महाप्रभु पापियों को उबारने के लिए अवतार लिया था, तो फिर जो सबसे बड़ा पापी और नीच है, वह प्रभु के विचार करने के लिए सबसे पहला उम्मीदवार है। महाराज प्रतापरुद्र खुद को सबसे गिरी हुई आत्मा मानते थे क्योंकि उन्हें लगातार भौतिक चीजों से निपटना पड़ता था और भौतिक लाभों का आनंद उठाना पड़ता था। श्री चैतन्य महाप्रभु का काम सबसे गिरे हुए लोगों को मुक्ति दिलाना था। तो, वह राजा को कैसे अस्वीकार कर सकते थे? एक व्यक्ति जितना अधिक पतित होता है, उसका प्रभु द्वारा उद्धार करने का उतना ही अधिक अधिकार होता है -- बेशक, शर्त यह है कि उसने खुद को प्रभु के प्रति समर्पित कर दिया हो। महाराज प्रतापरुद्र एक पूरी तरह से समर्पित आत्मा थे; इसलिए, प्रभु उन्हें इस आधार पर मना नहीं कर सकते थे कि वह दुनियावी पाउंड-शिलिंग वाले व्यक्ति हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥