चारि गोसाञि र कैल राय चरण वन्दन ।
यथा - योग्य सब भक्तेर करिल मिलन ॥34॥
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अनुवाद
इसलिए श्री रामानन्द राय ने भगवान के सभी भक्तों, विशेषकर चारों गुरुओं को प्रणाम किया। इस प्रकार रामानन्द राय ने सभी भक्तों का यथोचित स्वागत किया।
Sri Ramanand Rai greeted all the devotees, especially the four Gurus, and met all other devotees appropriately.
तात्पर्य
इस श्लोक में उल्लिखित चार अध्यात्मिक गुरु परमानंद पुरी, ब्रह्मानंद भारती, स्वरूप दामोदर और भगवान नित्यानंद हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥