अनर्पित-चरीं चिरत करूणयावतीर्णः कलौ
समर्पयितुम उन्नतोज्ज्वल-रसां स्व-भक्ति-श्रीयम्
श्री चैतन्य महाप्रभु माधुर्य-रस की सर्वोच्च श्रेष्ठता को प्रदर्शित करने के लिए कली युग में प्रकट हुए, जो उपहार पहले किसी आचार्य या अवतार द्वारा नहीं दिया गया था। परिणामस्वरूप श्री चैतन्य महाप्रभु को सबसे बड़े अवतार के रूप में स्वीकार किया जाता है। वह केवल एक ही हैं जिन्होंने कृष्ण के प्रति प्रेम को बांटा जबकि वैवाहिक रस में कृष्ण से प्रेम करने की सर्वोच्च श्रेष्ठता का प्रदर्शन किया।
