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श्लोक 2.11.237  |
कीर्तन देखिया राजार हैल चमत्कार ।
प्रभुके मिलिते उत्कण्ठा बाड़िल अपार ॥237॥ |
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| अनुवाद |
| श्री चैतन्य महाप्रभु का कीर्तन देखकर राजा को बहुत आश्चर्य हुआ और उनसे मिलने की राजा की उत्सुकता असीम रूप से बढ़ गई। |
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| The king was very surprised to see Mahaprabhu's kirtan and his eagerness to meet Mahaprabhu increased greatly. |
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