|
| |
| |
श्लोक 2.11.209  |
नाना पिठा - पाना खाय आकण्ठ पूरिया ।
मध्ये मध्ये ‘हरि’ कहे आनन्दित ह ञा ॥209॥ |
|
| |
| |
| अनुवाद |
| उन्होंने तरह-तरह के केक और मीठे चावल खाकर अपना पेट भर लिया और बीच-बीच में बड़े हर्ष से भगवान का पवित्र नाम जपते रहे। |
| |
| He ate all kinds of sweets and kheer to his heart's content and in between he joyfully chanted the holy name of 'Hari'. |
| ✨ ai-generated |
| |
|