श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 209
 
 
श्लोक  2.11.209 
नाना पिठा - पाना खाय आकण्ठ पूरिया ।
मध्ये मध्ये ‘हरि’ कहे आनन्दित ह ञा ॥209॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने तरह-तरह के केक और मीठे चावल खाकर अपना पेट भर लिया और बीच-बीच में बड़े हर्ष से भगवान का पवित्र नाम जपते रहे।
 
He ate all kinds of sweets and kheer to his heart's content and in between he joyfully chanted the holy name of 'Hari'.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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