vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ
»
श्लोक 208
श्लोक
2.11.208
स्वरूप गोसाञि, दामोदर, जगदानन्द ।
वैष्णवेरे परिवेशे तिन जने - आनन्द ॥208॥
अनुवाद
तब स्वरूप दामोदर गोस्वामी, दामोदर पंडित और जगदानंद सभी बड़े आनंद से भक्तों को प्रसाद वितरित करने लगे।
After this, Swarup Damodar Goswami, Damodar Pandit and Jagadananda distributed Prasad to the devotees with great joy.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd