श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 196
 
 
श्लोक  2.11.196 
नित्यानन्द, जगदानन्द, दामोदर, मुकुन्द ।
हरिदासे मिलि’ सबे पाइल आनन्द ॥196॥
 
 
अनुवाद
जब नित्यानंद प्रभु, जगदानंद प्रभु, दामोदर प्रभु और मुकुंद प्रभु हरिदास ठाकुर से मिले, तो वे सभी बहुत प्रसन्न हुए।
 
Nityananda Prabhu, Jagadananda Prabhu, Damodar Prabhu and Mukunda Prabhu were very happy to meet Haridas Thakur.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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