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श्लोक 177
श्लोक
2.11.177
मिश्र कहे , - सब तोमार, चाह कि कारणे ? ।
आपन - इच्छाय लह, येइ तोमार मने ॥177॥
अनुवाद
तब काशी मिश्र ने श्री चैतन्य महाप्रभु से कहा: "सब कुछ आपका है। आपके भिक्षा मांगने का क्या लाभ? आप अपनी इच्छा से जो चाहें ले सकते हैं।"
Then Kashi Mishra said to Sri Chaitanya Mahaprabhu, "Everything is yours. What's the use of asking for it? You can take whatever you want."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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