श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 165
 
 
श्लोक  2.11.165 
हरिदास कहे , - मुञि नीच - जाति छार ।
मन्दिर - निकटे याइते मोर नाहि आधिकार ॥165॥
 
 
अनुवाद
हरिदास ठाकुर ने उत्तर दिया, "मैं मंदिर के पास नहीं जा सकता क्योंकि मैं नीच जाति का, घृणित व्यक्ति हूँ। मुझे वहाँ जाने का कोई अधिकार नहीं है।"
 
Haridasa Thakura replied, "I cannot go near the temple, because I am a low-caste, wretched person. I have no right to go there."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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