श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 159-160
 
 
श्लोक  2.11.159-160 
आचार्यरत्न, विद्यानिधि, पण्डित गदाधर ।
गङ्गादास, हरि - भट्ट, आचार्य पुरन्दर ॥159॥
प्रत्येके सबार प्रभु करि’ गुण गान ।
पुनः पुनः आलिङ्गिया करिल सम्मान ॥160॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने आचार्य रत्न, विद्यानिधि, पंडित गदाधर, गंगादास, हरिभट्ट और आचार्य पुरंदर सहित सभी भक्तों को बार-बार गले लगाया। भगवान ने उनके गुणों का वर्णन किया और बार-बार उनकी महिमा की।
 
After this, Sri Chaitanya Mahaprabhu repeatedly embraced all the devotees, including Acharyaratna, Vidyanidhi, Pandit Gadadhara, Gangadasa, Haribhatta, and Acharya Purandara, praising their virtues and repeatedly honoring them.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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