श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 139
 
 
श्लोक  2.11.139 
वासु कहे, - मुकुन्द आदौ पाइल तोमार सङ्ग ।
तोमार चरण पाइल सेइ पुनर्जन्म ॥139॥
 
 
अनुवाद
वासुदेव ने उत्तर दिया, "मुकुंद को आरंभ में आपका सानिध्य प्राप्त हुआ था। अतः उन्होंने आपके चरणकमलों की शरण ली है। यही उनका दिव्य पुनर्जन्म है।"
 
Vasudeva replied, "Mukunda was initially accompanied by you. Therefore, he has taken refuge at your lotus feet. This is his divine rebirth."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)