श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 132
 
 
श्लोक  2.11.132 
आपन - निकटे प्रभु सबा वसाइला ।
आपनि श्री - हस्ते सबारे माल्य - गन्ध दिला ॥132॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने सभी भक्तों को अपने पास बैठाया और अपने हाथों से उन्हें माला और चंदन भेंट किया।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu made all the devotees sit near him and gave them garlands and sandalwood paste with his own hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)