vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ
»
श्लोक 125
श्लोक
2.11.125
सिंह - द्वार डाहिने छा ड़ि’ सब वैष्णव - गण ।
काशी - मिश्र - गृह - पथे करिला गमन ॥125॥
अनुवाद
मंदिर के मुख्य द्वार अर्थात सिंहद्वार के दाहिनी ओर से प्रारम्भ करके सभी वैष्णव काशी मिश्र के भवन की ओर बढ़ने लगे।
From the right side of the main gate of the temple, all the Vaishnavas started moving towards Kashi Mishra's house.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×