श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 125
 
 
श्लोक  2.11.125 
सिंह - द्वार डाहिने छा ड़ि’ सब वैष्णव - गण ।
काशी - मिश्र - गृह - पथे करिला गमन ॥125॥
 
 
अनुवाद
मंदिर के मुख्य द्वार अर्थात सिंहद्वार के दाहिनी ओर से प्रारम्भ करके सभी वैष्णव काशी मिश्र के भवन की ओर बढ़ने लगे।
 
From the right side of the main gate of the temple, all the Vaishnavas started moving towards Kashi Mishra's house.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)