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अनुवाद
“यदि किसी व्यक्ति पर श्री चैतन्य महाप्रभु की कृपा नहीं होती है - चाहे वह व्यक्ति कितना भी विद्वान क्यों न हो और चाहे वह देखता या सुनता हो - वह भगवान चैतन्य को भगवान के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता।
“Unless a person is blessed by Sri Chaitanya Mahaprabhu, no matter how great a scholar he is and how much he sees or hears, he cannot accept Mahaprabhu as the Supreme Personality of Godhead.”
तात्पर्य
येही सिद्धांत आसुरी व्यक्तियों पर भी लागू किया जा सकता है, हालांकि वे भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु के सम्प्रदाय के ही क्यों न हों। भगवान की विशेष शक्ति प्राप्त किए बिना उनके गुणों का विश्व स्तर पर प्रसारण नहीं कर सकते। हालांकि कोई खुद को श्री चैतन्य महाप्रभु का विद्वान अनुयायी बताए और भगवान के पवित्र नाम का विश्व स्तर पर प्रचार करने की कोशिश करे, लेकिन अगर उस पर श्री चैतन्य महाप्रभु की कृपा नहीं है, तो वह शुद्ध भक्तों में खामी निकालेगा और यह समझ नहीं पाएगा कि भगवान चैतन्य किसी उपदेशक को कैसे अधिकार देते हैं। जब कोई कृष्ण भावना आंदोलन की आलोचना करता है जो अब पूरे विश्व में फैला हुआ है या इस आंदोलन या इसके नेता में खामी निकालता है, तो उसे श्री चैतन्य महाप्रभु की दया से वंचित समझा जाना चाहिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥