श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 11: श्री चैतन्य महाप्रभु की बेड़ा-कीर्तन लीलाएँ  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  2.11.102 
भट्ट कहे , - ताँर कृपा - लेश हय याँरे ।
सेइ से ताँहारे ‘कृष्ण’ करि’ लइते पारे ॥102॥
 
 
अनुवाद
भट्टाचार्य ने उत्तर दिया, "जिस व्यक्ति को श्री चैतन्य महाप्रभु की कृपा का थोड़ा सा अंश भी प्राप्त हुआ है, वही समझ सकता है कि वे भगवान कृष्ण हैं। कोई और नहीं समझ सकता।"
 
Bhattacharya replied, only the person who has received even a little bit of Sri Chaitanya Mahaprabhu's grace can understand that He is Krishna and no one else.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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