श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 10: महाप्रभु का जगन्नाथ पुरी लौट आना  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  2.10.98 
पुरी कहे, - तोमा - सङ्गे रहिते वाञ्छा करि’ ।
गौड़ हैते च लि’ आइलाङ नीलाचल - पुरी ॥98॥
 
 
अनुवाद
परमानंद पुरी ने उत्तर दिया, "मैं भी आपके साथ रहना चाहता हूँ। इसलिए मैं बंगाल, गौड़ से जगन्नाथ पुरी आया हूँ।"
 
Paramananda Puri said, "I also want to be with you. That is why I have come to Jagannath Puri from Gauradesh (Bengal)."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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