श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 10: महाप्रभु का जगन्नाथ पुरी लौट आना  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  2.10.97 
प्रभु कहे, - तोमा - सङ्गे रहिते वाञ्छा हय ।
मोरे कृपा करि’ कर नीलाद्रि आश्रय ॥97॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "कृपया मेरे साथ रहें और जगन्नाथ पुरी की शरण स्वीकार करके मुझ पर कृपा करें।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said, “Please stay with me and bless me by taking shelter of Jagannatha Puri.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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