श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 10: महाप्रभु का जगन्नाथ पुरी लौट आना  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  2.10.84 
राघव - पण्डित, आर आचार्य नन्दन ।
कतेक कहिब आर यत प्रभुर गण ॥84॥
 
 
अनुवाद
राघव पंडित, नंदन आचार्य और सभी भक्तगण बहुत संतुष्ट हुए। मैं कितने लोगों का वर्णन कर सकता हूँ?
 
Raghava Pandit, Advaita Acharya's son, and all the devotees were delighted. How far should I go in listing the names of the other devotees?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)