श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 10: महाप्रभु का जगन्नाथ पुरी लौट आना  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  2.10.81 
हरिदास ठाकुरेर हैल परम आनन्द ।
वासुदेव दत्त, गुप्त मुरारि, सेन शिवानन्द ॥81॥
 
 
अनुवाद
यह शुभ समाचार सुनकर हरिदास ठाकुर, वासुदेव दत्त, मुरारी गुप्त और शिवानन्द सेना भी अत्यन्त प्रसन्न हुए।
 
Haridasa Thakura was delighted to receive this good news. Vasudeva Dutta, Murari Gupta, and Shivananda Sen were also delighted.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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