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श्लोक 2.10.77  |
शुनिया आनन्दित हैल शचीमातार मन ।
श्रीवासादि आर यत यत भक्त - गण ॥77॥ |
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| अनुवाद |
| इस शुभ समाचार से माता शची तथा श्रीवास ठाकुर आदि नवद्वीप के समस्त भक्तों को बहुत प्रसन्नता हुई। |
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| All the devotees of Navadweep like Mata Shachi and Shrivas Thakur etc. were extremely happy with this good news. |
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