श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 10: महाप्रभु का जगन्नाथ पुरी लौट आना  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  2.10.77 
शुनिया आनन्दित हैल शचीमातार मन ।
श्रीवासादि आर यत यत भक्त - गण ॥77॥
 
 
अनुवाद
इस शुभ समाचार से माता शची तथा श्रीवास ठाकुर आदि नवद्वीप के समस्त भक्तों को बहुत प्रसन्नता हुई।
 
All the devotees of Navadweep like Mata Shachi and Shrivas Thakur etc. were extremely happy with this good news.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd