| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 2: मध्य लीला » अध्याय 10: महाप्रभु का जगन्नाथ पुरी लौट आना » श्लोक 7 |
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| | | | श्लोक 2.10.7  | भट्ट कहे , - ये शुनिला सब सत्य हय ।
ताँर दर्शन तोमार घटन ना हय ॥7॥ | | | | | | | अनुवाद | | भट्टाचार्य ने उत्तर दिया, "आपने जो कुछ सुना है वह सब सत्य है, किन्तु जहाँ तक साक्षात्कार का प्रश्न है, उसका प्रबंध करना बहुत कठिन है। | | | | Bhattacharya replied, "Whatever you have heard is true. But as for the gift, it is very difficult to arrange it." | | ✨ ai-generated | | |
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