श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 10: महाप्रभु का जगन्नाथ पुरी लौट आना  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  2.10.59 
दिन - पाँच - सात भितरे आसिबे रामानन्द ।
ताँर सङ्गे पूर्ण हबे आमार आनन्द ॥59॥
 
 
अनुवाद
"श्री रामानंद राय पाँच-सात दिन में आ रहे हैं। उनके आते ही मेरी मनोकामनाएँ पूरी हो जाएँगी। मुझे उनकी संगति में बहुत आनंद आता है।"
 
"Sri Ramanand is coming in five to seven days. As soon as he arrives, all our wishes will be fulfilled. I find immense joy in his company."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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