मानस, देह, गेह, यो किछु मोरा
अर्पिलुं तुया पदे नंद-किशोरा!
(शरणागति)
जब कोई भगवान के चरण कमलों में समर्पण करता है, तो वह अपने पास मौजूद हर चीज़ के साथ समर्पण करता है - उसका घर, उसका शरीर, उसका मन और उसके पास जो कुछ भी है। यदि इस समर्पण प्रक्रिया में कोई बाधा है, तो व्यक्ति को तुरंत बिना किसी आसक्ति के उसे छोड़ देना चाहिए। यदि कोई अपने सभी परिवार के सदस्यों के साथ समर्पण कर सकता है, तो उसे संन्यास लेने की आवश्यकता नहीं है। हालाँकि, यदि समर्पण प्रक्रिया तथाकथित परिवार के सदस्यों द्वारा बाधित होती है, तो व्यक्ति को समर्पण प्रक्रिया को पूरा करने के लिए तुरंत उन्हें छोड़ देना चाहिए।
