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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 2: मध्य लीला
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अध्याय 10: महाप्रभु का जगन्नाथ पुरी लौट आना
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श्लोक 32
श्लोक
2.10.32
काशी - मिश्र आ सि’ पड़िल प्रभुर चरणे ।
गृह - सहित आत्मा ताँरे कैल निवेदने ॥32॥
अनुवाद
जब श्री चैतन्य महाप्रभु उनके घर पहुंचे, तो काशी मिश्र तुरंत उनके चरण कमलों पर गिर पड़े और स्वयं को तथा अपनी सारी संपत्ति उन्हें समर्पित कर दी।
When Sri Chaitanya Mahaprabhu came to Kashi Mishra's house, he immediately fell at his feet and surrendered himself and his entire household to him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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