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श्लोक 2.10.32  |
काशी - मिश्र आ सि’ पड़िल प्रभुर चरणे ।
गृह - सहित आत्मा ताँरे कैल निवेदने ॥32॥ |
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| अनुवाद |
| जब श्री चैतन्य महाप्रभु उनके घर पहुंचे, तो काशी मिश्र तुरंत उनके चरण कमलों पर गिर पड़े और स्वयं को तथा अपनी सारी संपत्ति उन्हें समर्पित कर दी। |
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| When Sri Chaitanya Mahaprabhu came to Kashi Mishra's house, he immediately fell at his feet and surrendered himself and his entire household to him. |
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