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श्लोक 2.10.27  |
प्रभुर सहित आमा - सबार कराह मिलन ।
तोमार प्रसादे पाइ प्रभुर चरण ॥27॥ |
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| अनुवाद |
| "कृपया श्री चैतन्य महाप्रभु से हमारी भेंट का प्रबंध करें। आपकी कृपा से ही हम भगवान के चरणकमलों की शरण प्राप्त कर सकते हैं।" |
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| "Please arrange for us to meet Sri Chaitanya Mahaprabhu. Only through your grace can we attain refuge at the Lord's lotus feet." |
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