श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 10: महाप्रभु का जगन्नाथ पुरी लौट आना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.10.23 
काशी - मिश्र कहे , - आमि बड़ भाग्यवान् ।
मोर गृहे ‘प्रभु - पादेर’ हबे अवस्थान ॥23॥
 
 
अनुवाद
जब काशी मिश्र ने यह प्रस्ताव सुना तो उन्होंने कहा, "मैं बहुत भाग्यशाली हूँ कि प्रभुओं के प्रभु श्री चैतन्य महाप्रभु मेरे घर पर रहेंगे।"
 
When Kashi Mishra heard this proposal, he said, “I am extremely fortunate that Sri Chaitanya Mahaprabhu, the Lord of all Lords, will stay at my house.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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