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श्री चैतन्य चरितामृत
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अध्याय 10: महाप्रभु का जगन्नाथ पुरी लौट आना
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श्लोक 188
श्लोक
2.10.188
सबे आ सि’ मिलिला प्रभुर श्री - चरणे ।
प्रभु कृपा करि’ सबाय राखिल निज स्थाने ॥188॥
अनुवाद
चूँकि सभी भक्त उनकी शरण में आये थे, इसलिए भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने उन सभी पर दया की और उन्हें अपने संरक्षण में रखा।
Since all the devotees started coming to him for shelter, Sri Chaitanya Mahaprabhu showed mercy on them all and kept them under his protection.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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