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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 10: महाप्रभु का जगन्नाथ पुरी लौट आना  »  श्लोक 182
 
 
श्लोक  2.10.182 
प्रभु कहे, - ‘विष्णु’ ‘विष्णु’, कि कह सार्वभौम ।
‘अति - स्तुति’ हय एइ निन्दार लक्षण ॥182॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "सार्वभौम भट्टाचार्य, आप क्या कह रहे हैं? भगवान विष्णु, मेरी रक्षा कीजिए! ऐसा महिमामंडन तो ईशनिंदा का ही दूसरा रूप है।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said, "Oh Sarvabhauma Bhattacharya, what are you saying? Oh Vishnu! Save me! Such praise is another form of blasphemy."
तात्पर्य
श्री चैतन्य महाप्रभु भट्टाचार्य के बयान से कुछ शर्मिंदा थे; इसलिए उन्होंने अपनी रक्षा के लिए विष्णु नाम का उच्चारण किया। प्रभु ने यहाँ पुष्टि की कि यदि किसी को अतिमान करके देखा जाता है, तो उसका गौरव भी निंदा का ही एक और रूप है। इस तरह उन्होंने उस तथाकथित अपमानजनक बयान का विरोध किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)