प्रेमानजना-चुरिता-भक्ति-विलोचनेन
संतः सदैव हृदयेषु विलोकयति
यं श्यामसुंदरमचिन्त्य-गुण-स्वरूपं
गोविंदम आदि-पुरुषं तम अहं भजामि
"मैं आदिम प्रभु, गोविंद की पूजा करता हूं, जो भक्त द्वारा हमेशा देखा जाता है जिसकी आँखें प्रेम के गूदे से अभिषेक की जाती हैं। उन्हें भक्त के हृदय में स्थित श्यामसुंदर के अपने शाश्वत रूप में देखा जाता है।"
