श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 10: महाप्रभु का जगन्नाथ पुरी लौट आना  »  श्लोक 179
 
 
श्लोक  2.10.179 
प्रभु कहे, - कृष्णे तोमार गाढ़ प्रेमा हय ।
याहाँ नेत्र पड़े, ताहाँ श्रीकृष्ण स्फुरय ॥179॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने उत्तर दिया, "कृष्ण के प्रति आपका गहन प्रेम है; इसलिए आप जहाँ भी अपनी दृष्टि घुमाते हैं, आपकी कृष्णभावनामृत और अधिक तीव्र हो जाती है।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu replied, “You have immense love for Krishna, therefore wherever you look, your Krishna consciousness increases.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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