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श्री चैतन्य चरितामृत
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श्लोक 118
श्लोक
2.10.118
सेइ दामोदर आ सि’ दण्डवत् हैला ।
चरणे पड़िया श्लोक पड़िते लागिला ॥118॥
अनुवाद
जब स्वरूप दामोदर जगन्नाथ पुरी आये, तो वे श्री चैतन्य महाप्रभु के चरण कमलों में गिर पड़े, उन्हें प्रणाम किया और एक श्लोक का पाठ किया।
The same form of Damodar came to Jagannath Puri and fell at the lotus feet of Sri Chaitanya Mahaprabhu and after paying obeisance, he recited a verse.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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