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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 10: महाप्रभु का जगन्नाथ पुरी लौट आना  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  2.10.108 
सन्न्यास करिला शिखा - सूत्र - त्याग - रूप ।
योग - पट्ट ना निल, नाम हैल ‘स्वरूप’ ॥108॥
 
 
अनुवाद
संन्यास ग्रहण करने के बाद, पुरुषोत्तम आचार्य ने जटा और जनेऊ त्यागकर विधि-विधानों का पालन किया, किन्तु उन्होंने भगवा वस्त्र धारण नहीं किया। उन्होंने संन्यासी की उपाधि भी स्वीकार नहीं की, बल्कि नैष्ठिक-ब्रह्मचारी बने रहे।
 
After taking sannyasa, Purushottam Acharya, as per the rules, gave up his topknot and sacred thread, but he refused to accept the saffron robe. He also refused the title of sannyasi, instead remaining a devout celibate.
तात्पर्य
संन्यासी संप्रदाय के लिए नियंत्रित करने वाले सिद्धांत है। व्यक्ति को अष्टविध श्राद्ध करने होते हैं। व्यक्ति को अपने पूर्वजों को तर्पण देना चाहिए और वीराज होम यज्ञ करना चाहिए। फिर व्यक्ति को शिखा नामक बालों के गुच्छे को काट देना चाहिए और यज्ञोपवीत को भी छोड़ देना चाहिए। ये संन्यास ग्रहण करने में प्रारंभिक प्रक्रियाएं हैं और स्वरूप दामोदर ने सभी को स्वीकार किया। हालांकि, पुरुषोत्तम आचार्य ने भगवा वस्त्र, संन्यासी का नाम या दंड नहीं स्वीकारा और इसी कारण से उन्होंने अपना ब्रह्मचारी नाम बनाए रखा। वास्तव में पुरुषोत्तम आचार्य ने औपचारिक रूप से संन्यास नहीं लिया था, लेकिन उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर दिया था। वह संन्यास के औपचारिकता से परेशान नहीं होना चाहते थे। वह बिना किसी बाधा के केवल भगवान श्री कृष्ण की पूजा करना चाहते थे; इसलिए उन्होंने पूरे दिल और आत्मा के साथ त्याग ग्रहण किया लेकिन इसके साथ औपचारिकता नहीं की। त्याग का अर्थ है भगवान श्री कृष्ण, परमेश्वर व्यक्तित्व के अलावा कुछ नहीं करना। जब कोई व्यक्ति इस आधार पर कार्य करता है, भगवान श्री कृष्ण को प्रसन्न करने की कोशिश करता है, तो वह संन्यासी और योगी दोनों है। इसकी पुष्टि भगवद-गीता (6.1) में हुई है:

श्री भगवान उवाच

अनाश्रितः कर्म-फलं कार्यं कर्म करोति यः

स संन्यासी च योगी च न निरग्निर्न चाक्रियः

"भगवान श्रीकृष्ण ने कहा," जो व्यक्ति अपने कार्य के फल के प्रति आसक्त नहीं होता और वह जैसे बाध्य होता है कार्य करता है, वह जीवन में संन्यासी है और सच्चा रहस्यवादी है, न कि वह जो आग नहीं जलाता और कोई काम नहीं करता है। "

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)