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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  2.1.97 
क्षीर - चुरि - कथा, साक्षि - गोपाल - विवरण ।
नित्यानन्द कैल प्रभुर दण्ड - भञ्जन ॥97॥
 
 
अनुवाद
नित्यानंद प्रभु से भगवान चैतन्य महाप्रभु ने क्षीर-कुरि गोपीनाथ और साक्षी गोपाल की कथा सुनी। तब नित्यानंद प्रभु ने भगवान चैतन्य महाप्रभु की संन्यास-दंड को तोड़ दिया।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu heard the stories of Ksheer-Churi Gopinath and Sakshigopal from Nityananda Prabhu. After this, Nityananda Prabhu broke the sannyasa punishment of Sri Chaitanya Mahaprabhu.
तात्पर्य
हिंदी-متن: यह क्षीर-चुरी गोपीनाथ रमुणा में स्थित है, जो कि पूर्वोत्तर रेलवे के बलेश्वर (बालासोर) स्टेशन से लगभग चार मील दूर है, जिसे पहले बंगाल मायापुर रेलवे के नाम से जाना जाता था। यह स्टेशन प्रसिद्ध खड़गपुर जंक्शन स्टेशन से कुछ मील दूर स्थित है। कुछ समय पहले मंदिर की देखरेख मेदिनीपुर जिले की सीमा पर स्थित गोपीबल्लभपुरा के श्यामसुंदर अधिकारी को सौंपी गई थी। श्यामसुंदर अधिकारी शामानंद गोस्वामी के मुख्य शिष्य रसिकानंद मुराड़ी के वंशज थे।

जगन्नाथ पुरी स्टेशन से कुछ मील पहले साक्षी-गोपाल नामक एक छोटा सा स्टेशन है। इस स्टेशन के पास सत्यवादी नामक एक गाँव है, जहाँ साक्षी-गोपाल का मंदिर स्थित है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)