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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  2.1.94 
शान्तिपुरे आचार्येर गृहे आगमन ।
प्रथम भिक्षा कैल ताहाँ, रात्रे सङ्कीर्तन ॥94॥
 
 
अनुवाद
तीन दिन बाद, भगवान चैतन्य महाप्रभु शांतिपुर में अद्वैत आचार्य के घर आए और वहाँ भिक्षा ग्रहण की। यह उनकी पहली भिक्षा ग्रहण थी। रात्रि में उन्होंने वहाँ सामूहिक जप किया।
 
Three days later, Sri Chaitanya Mahaprabhu came to the home of Advaita Acharya in Shantipur and accepted alms there. This was his first alms-giving. That night, he performed group kirtan there.
तात्पर्य
ऐसा प्रतीत होता है कि अपनी अलौकिक तल्लीनता मे श्री चैतन्य महाप्रभु तीन दिनों तक खाना भूल गए। तब वे नित्यानंद प्रभु द्वारा गुमराह कर दिए गए, जिन्होंने कहा कि गंगा नदी यमुना थी। चूँकि भगवान वृंदावन जाने के आनंद में थे, इसलिए उन्हें यमुना देखकर खुशी हुई, हालाँकि वास्तविकता में नदी गंगा थी। इस तरह तीन दिनों के बाद भगवान को शान्तिपुर में अद्वैत प्रभु के घर लाया गया, और उन्होंने वहाँ भोजन स्वीकार किया। जब तक भगवान वहाँ रहे, उन्होंने अपनी माँ शची देवी को देखा और हर रात सभी भक्तों के साथ सामूहिक भजन किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)