श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  2.1.85 
एइ - मत महाप्रभु देखि’ जगन्नाथे ।
सुभद्रा - सहित देखे, वंशी नाहि हाते ॥85॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार जब श्री चैतन्य महाप्रभु ने जगन्नाथ को देखा तो उन्होंने देखा कि भगवान अपनी बहन सुभद्रा के साथ थे और उनके हाथ में बांसुरी नहीं थी।
 
Thus when Sri Chaitanya Mahaprabhu saw Jagannatha, he saw that he was accompanied by his sister Subhadra and did not have the flute in his hand.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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