vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ
»
श्लोक 8
श्लोक
2.1.8
पूर्वे कहिलुँ आदि - लीलार सूत्र - गण ।
याहा विस्तारियाछेन दास - वृन्दावन ॥8॥
अनुवाद
मैंने पहले ही आदि-लीला [प्रारंभिक लीला] का सारांश में वर्णन किया है, जिसका वृन्दावन दास ठाकुर द्वारा पहले ही पूर्ण वर्णन किया जा चुका है।
Before this I have briefly described the Adilila (preliminary pastimes), which have already been described in detail by Vrindavana Das Thakura.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×