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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  2.1.71 
स्वरूपे पुछेन प्रभु हइया विस्मिते ।
मोर मनेर कथा रूप जानिल केमते ॥71॥
 
 
अनुवाद
चैतन्य महाप्रभु ने बड़े आश्चर्य से स्वरूप दामोदर को यह श्लोक दिखाया और उनसे पूछा कि रूप गोस्वामी उनके मन के इरादों को कैसे समझ सकते हैं।
 
Showing the verse to Svarupa Damodara with great surprise, Chaitanya Mahaprabhu asked him how Svarupa Goswami could understand the feeling in his mind.
तात्पर्य
जब हमने उनके जन्मदिवस समारोह में एक निबंध प्रस्तुत किया था, तो हमें श्रील भक्तिसिद्धान्त सरस्वती गोस्वामी से भी ऐसा ही आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर मिला था। वह उस निबंध से इतने प्रसन्न थे कि वह अपने कुछ गोपनीय भक्तों को बुलाते थे और उन्हें वह निबंध दिखाते थे। हम श्रील प्रभुपाद के इरादों को कैसे समझ पाते ?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)