vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ
»
श्लोक 7
श्लोक
2.1.7
जय जय नित्यानन्द जयाद्वैत - चन्द्र ।
जय श्रीवासादि जय गौर - भक्त - वृन्द ॥7॥
अनुवाद
भगवान नित्यानन्द और अद्वैत प्रभु की जय हो, तथा श्रीवास ठाकुर आदि भगवान चैतन्य के सभी भक्तों की जय हो!
Victory to Sri Nityananda Prabhu and Advaita Prabhu! Victory to Srivasa Thakur and all the devotees of Sri Chaitanya Mahaprabhu!
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×