श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.1.35 
हरि - भक्ति - विलास, आर भागवतामृत ।
दशम - टिप्पनी, आर दशम - चरित ॥35॥
 
 
अनुवाद
श्रील सनातन गोस्वामी द्वारा संकलित कुछ पुस्तकें हरि-भक्ति-विलास, बृहद-भागवतामृत, दशम-तिप्पानि और दशम-चरित थीं।
 
Some of the books written by Srila Sanatana Goswami are Haribhakti-vilasa, Brihad Bhagavatamrita, Dashama-commentary and Dashama-charita.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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