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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 286
 
 
श्लोक  2.1.286 
एइ त’ कहिल मध्य - लीलार सूत्र - गण ।
शेष द्वादश व त्सरेर शुन विवरण ॥286॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैंने मध्यलीला का सारांश प्रस्तुत किया है। अब कृपया भगवान ने पिछले बारह वर्षों में जो लीलाएँ कीं, उन्हें सुनिए।
 
Thus I have summarized the Madhya Leela. Now please listen to the pastimes performed by Mahaprabhu in the last twelve years.
तात्पर्य
इस प्रकार श्रील काव्यराज गोस्वामी, श्री व्यासदेव के पदचिन्हों पर सख्ती से चलते हुए, श्री चैतन्य-चरितामृत की लीलाओं का सारांश देते हैं। उन्होंने प्रत्येक कांड के अंत में ऐसा वर्णन दिया है। आदि-लीला में उन्होंने प्रभु के पांच अवस्थाओं में लड़कपन के विहारों की रूपरेखा दी, विवरण को श्रील वृंदावन दास ठाकुर पर छोड़ दिया। अब इस अध्याय में प्रभु के जीवन के अंत में घटित होने वाले विहारों का सारांश दिया गया है। ये मध्य-लीला और अंत्य-लीला में वर्णित हैं। शेष विहारों का वर्णन मध्य-लीला के दूसरे अध्याय में संक्षेप में किया गया है। इस तरह लेखक ने धीरे-धीरे मध्य-लीला और अंत्य-लीला दोनों का वर्णन किया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)