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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 283
 
 
श्लोक  2.1.283 
रघुनाथ - दास नित्यानन्द - पाशे गेला ।
चिड़ा - दधि - महोत्सव ताहाङिकरिला ॥283॥
 
 
अनुवाद
इस समय, रघुनाथदास श्री नित्यानंद प्रभु के पास गए और उनकी आज्ञा के अनुसार, भोज तैयार किया और चावल और दही से बना प्रसाद वितरित किया।
 
After this, Raghunath Das went to Shri Nityananda Prabhu and as per his orders, organised a festival and distributed Prasad consisting of puffed rice and curd.
तात्पर्य
बंगाल में एक विशेष व्यंजन है, जिसमें चावल के टुकड़े दही के साथ, और कभी-कभी सन्देश और आम के साथ मिलाए जाते हैं। यह एक बहुत ही स्वादिष्ट भोजन है जिसे देवता को अर्पित किया जाता है और फिर जनता में वितरित किया जाता है। रघुनाथ दास गोस्वामी, जो उस समय एक गृहस्थ थे, नित्यानंद प्रभु से मिले। उनकी सलाह के अनुसार, उन्होंने दधि-चिड़ा-प्रसाद का यह उत्सव मनाया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)