श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 272
 
 
श्लोक  2.1.272 
दश - दिके कोटी कोटी लोक हेन काले ।
जय कृष्ण - चैतन्य’ बलि’ करे कोलाहले ॥272॥
 
 
अनुवाद
जब श्री चैतन्य महाप्रभु स्पष्टतः क्रोधित थे और अपने भक्तों को डाँट रहे थे, तो बाहर खड़े हजारों लोग ऊँची आवाज में चिल्ला रहे थे, "श्री चैतन्य महाप्रभु की जय हो!"
 
While Sri Chaitanya Mahaprabhu was outwardly looking angry and harassing his devotees, thousands of devotees from outside called out loudly, “Victory to Sri Chaitanya Mahaprabhu!”
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas