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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 263
 
 
श्लोक  2.1.263 
तबे त’ वल्लभ भट्ट प्रभुरे मिलिला ।
कृष्ण - नामेर अर्थ प्रभु ताँहारे कहिला ॥263॥
 
 
अनुवाद
इसके तुरंत बाद, वल्लभ भट्ट जगन्नाथ पुरी में भगवान से मिले, और भगवान ने उन्हें कृष्ण के पवित्र नाम का महत्व समझाया।
 
Soon after this, Vallabha Bhatta met Mahaprabhu at Jagannatha Puri and Mahaprabhu explained to him the meaning of the holy name Krishna.
तात्पर्य
वल्लभ भट्ट पश्चिमी भारत के वैष्णव सम्प्रदाय के प्रमुख हैं जिसे वल्लभाचार्य-सम्प्रदाय के नाम से जाना जाता है। वल्लभ आचार्य के बारे में एक लंबी कहानी है जो चैतन्य-चरितामृत में वर्णित है, विशेष रूप से अंत्य-लीला के सातवें अध्याय और मध्य-लीला के उन्नीसवें अध्याय में। भगवान चैतन्य महाप्रभु ने प्रयाग के दूसरी ओर स्थित अडैल-ग्राम नामक स्थान पर वल्लभ आचार्य के घर का दौरा किया। बाद में, वल्लभ भट्ट ने श्रीमद्-भागवतम पर अपनी टीका समझाने के लिए जगन्नाथ पुरी में चैतन्य महाप्रभु को देखा। उन्हें अपने लेखन पर बहुत गर्व था, लेकिन श्री चैतन्य महाप्रभु ने उन्हें यह कहते हुए सही किया कि एक वैष्णव को विनम्र होना चाहिए और अपने पूर्ववर्तियों के पदचिन्हों का अनुसरण करना चाहिए। भगवान ने उनसे कहा कि श्रीधर स्वामी से श्रेष्ठ होने में उनका गर्व एक वैष्णव के लिए बिल्कुल भी शोभा नहीं देता।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)