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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 259
 
 
श्लोक  2.1.259 
तबे छोट हरिदासे प्रभु कैल दण्ड ।
दामोदर - पण्डित कैल प्रभुके वाक्य - दण्ड ॥259॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद भगवान ने कनिष्ठ हरिदास को दण्डित किया और दामोदर पंडित ने भगवान को चेतावनी दी।
 
After this Mahaprabhu punished little Haridas and Damodara Pandit gave some warnings to Mahaprabhu.
तात्पर्य
वास्तव में दामोदर पंडित भगवान के शाश्वत सेवक थे। वह कभी भी भगवान को दंड नहीं दे सकते थे, न ही उनकी कोई इच्छा थी, लेकिन उन्होंने भगवान को कुछ चेतावनी दी थी ताकि अन्य लोग उनकी निंदा न करें। बेशक, उन्हें पता होना चाहिए था कि भगवान सर्वोच्च भगवान हैं और किसी भी तरह से कार्य करने के लिए स्वतंत्र हैं। उन्हें चेतावनी देने की कोई आवश्यकता नहीं है, और इस तरह की हरकत उन्नत भक्तों द्वारा बहुत सराहनीय नहीं है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)